इस शरीर में क्रमशः कैवल्य (निर्वाण) गुणों के कारण, वासनाओं के न होने से, अप्रमेय होने से, उदार, अगण्य एवं तर्क के अगोचर होने से वे सभी गुण रहते हैं।
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