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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 2 • श्लोक 41
लोकेषु यच्छान्तिपथावतार-प्रपाचनाव्याकरणे निदानम्‌। बिम्बं तदप्यत्र सदावरुद्ध-माकाशधाताविव रूपधातु:॥
संसार में जो शान्ति के पथ का अवतार है उसका आदि कारण स्वरूप जो बिम्ब है वही बुद्ध बिम्ब है, वह भी हमेशा अवरुद्ध है जैसा कि रूप धातु आकाश धातु में अवरुद्ध (लगा हुआ) होता है।
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