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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 2 • श्लोक 4
बुद्धत्वमविनिर्भागशुक्लधर्मप्रभावितम्‌। आदित्याकाशवज्ज्ञानप्रहाणद्वयलक्षणम्‌॥
अविनिर्भाग तथा शुक्लधर्म से प्रभावित बुद्धत्व है जो सूर्य के तरह, आकाश के तरह तथा ज्ञान प्रहाण द्वय लक्षणयुक्त भी है।
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