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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 2 • श्लोक 39
अमेयगङ्कासिकतातिवृत्तै-र्गुणैरचिन्त्यैरसमैरुपेतः। सवासनोन्मूलितसर्वदोष-स्तथागतानाममलः स धातु: ॥
असड्ख्क गङ्गानदी के बालुकाओं के समान अनन्त असमान गुणों से युक्त, समस्त वासनाओं के उन्मूलन के कारण दोष रहित वह तथागत धातु अत्यन्त पवित्र निर्मल कहा गया है।
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