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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 2 • श्लोक 33
दृष्टपूर्व न तद्यस्माद्वालैर्जात्यन्धकायवत्‌। आयैंश्च सूतिकामध्यस्थितबालार्कबिम्बवत्‌॥
बालों द्वारा बह कभी भी नहीं देखा गया है जैसाकि - जन्म से ही अन्धों के तरह और आर्यो ने भी नहीं देखा है जैसे कि प्रभातकालीन बादलों से घिरा हुआ बाल-सूर्य का बिम्ब हो।
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