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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 2 • श्लोक 31
अचिन्त्यमनुगन्तव्यं त्रिज्ञानाविषयत्वतः। सर्वज्ञज्ञानविषयं बुद्धत्वं ज्ञानदेहिभिः॥
तीन ज्ञानो का अविषय होने से सर्वज् का ज्ञान विषय, जो बुद्धत्व है देह धारियों के लिए अचिन्त्य कहा गया है।
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