बुद्धत्व प्रकृतिप्रभावस्वर है यह जो कहा है उसमें आगन्तुक क्लेश आवरण तथा ज्ञेयावरण रूपी मेघ के घटाओं के जाल से आछादित सूर्य के तरह ही है। उस आच्छादन को, समग्र बुद्धगुणों से युक्त निर्मल, नित्य, ध्रुव, शाश्वत तत्त्व को धर्मौ के अकल्पनात्मक प्रविचयरूप ज्ञान के द्वारा देखा जा सकता है।
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