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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 2 • श्लोक 26
तदभावाद्‌ धरुवं ज्ञेयं शिवं शाश्वतमच्युतम्‌। पदं तदमलज्ञानं शुक्लधर्मास्पदत्वतः॥
उसके अभाव के कारण ध्रुव, शिव, शाश्वत तथा अच्युत पद ही वह अमल ज्ञान है जिसमें शुक्लधर्मो का निवास होता है।
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