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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 2 • श्लोक 23
अनास्त्रवत्वं क्लेशानां सवासननिरोधतः। असङ्गाप्रतिघातत्वाऱ्ञञानस्य व्यापिता मता॥
क्लेशों को अनास्रव का अर्थ है वासनाओं का निरोध। और असङ्ग अप्रतिघा तथा ज्ञान की व्यापकता से यह होता है।
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