समाधि संस्पर्श सुख की अनुभूति, स्वभावगाम्भीर्य नय का अवबोधन, सुसूक्ष्म चिन्तन रूपी परमार्थ गुफा रूप तथागत व्योम है जहाँ समग्र निमित्त नहीं रहते हैं।
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