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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 97
जघन्यनारीजठरे नृपत्वं यथा भवेन्मृत्सु च रत्नबिम्बम्‌। आगन्तुकक्लेशमलावृतेषु सत्त्वेषु तद्वत्‌ स्थित एष धातु: ॥
नारी के पेट (तुच्छ) में राजा, मिट्टी में रत्नों का बिम्ब तथा आगन्तुक क्लेश मलों में आवृत प्राणियों में यह तथागत धातु स्थित है।
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