जघन्यनारीजठरे नृपत्वं यथा भवेन्मृत्सु च रत्नबिम्बम्। आगन्तुकक्लेशमलावृतेषु सत्त्वेषु तद्वत् स्थित एष धातु: ॥
नारी के पेट (तुच्छ) में राजा, मिट्टी में रत्नों का बिम्ब तथा आगन्तुक क्लेश मलों में आवृत प्राणियों में यह तथागत धातु स्थित है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।