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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 94
अतोऽनागम्य बुद्धत्वं निर्वाणं नाधिगम्यते॥ न हि शक्यः प्रभारश्मी निर्वृज्य प्रेक्षितुं रविः॥
अतः बुद्धत्व को बिना जाने निर्वाण की प्राप्ति संभव नहीं है। सूर्य के प्रभा रश्मि को हटाकर सूर्य को नहीं देखा जा सकता है।
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