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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 92
लेखका ये तदाकारा दानशीलक्षमादयः। सर्वाकारवरोपेता शून्यता प्रतिमोच्यते॥
यही यहाँ उपमा दी गई है। यहाँ जो लेखक हैं वे तदाकार दान-शील-क्षमा आदि पारमिता है। वह प्रतिमा जिसका निर्माण किया जा रहा था वह सर्वाकारवरोपेत शून्यता ही है।
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