देशान्तरगते तस्मिन् प्रतिमा तद्वियोगतः। न सा सर्वाङ्गसंपूर्णा भवेदित्युपमा कृता॥
अत: वह चित्र राजा का जिसे सब मिलकर बना रहे थे पूर्ण नहीं हुआ किन्तु अपूर्ण एवं विकृत ही हुआ।
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