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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 90
ततस्तस्य प्रतिश्रुत्य युञ्जेरंश्चित्रकर्मणि। तत्रैको व्यभियुक्तानामन्यदेशतो भवेत्‌॥
प्रभु की आज्ञा से वे सब चित्रकार अपने अपने हिस्सों का चित्र बनाने लगे। परन्तु बीच में ही एक चित्रकार किसी कारणवश अन्यत्र चला गया।
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