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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 82
वासनाव्याधिभिः सूक्ष्मैर्बाध्यते न शिवत्वतः। अनास्त्रवाभिसंस्कारैः शाश्वतत्वान्न जीर्यते॥
शिवत्व होने से सूक्ष्म वासना रूप व्याधियों से बाधित नहीं होते। शाश्वत होने से अनास्रव अभिसंस्कारों से भी बुद्धत्व को प्राप्त नहीं होते।
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