ज्ञान और कृपा के द्वारा साथ ही दुःख और क्लेश के नाश से शक्ति की अवस्थिति होती है। उपर्युक्त आदि के तीन गुणों से स्वार्थ सम्पत् (शक्ति) तथा परार्थ (शक्ति) अन्य तीन गुणों से घोषित होती है।
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