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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 73
नित्योज्ज्वलितबुद्धिश्च॒ कृत्यसंपादनेऽग्निवत्‌। शान्तध्यानसमापत्तिप्रतिपऱ्नश्च सर्वदा॥
वे बोधिसत्त्व नित्य उज्जवल बुद्धि सम्पन्न होते हैं तथा अग्नि के तरह ही काम भी करते हैं। शान्त ध्यान समापत्ति में हमेशा लगे रहते हैं।
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