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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 72
यथैव नाम्भसा पदां लिप्यते जातमम्भसि। तथा लोकेऽपि जातोऽसौ लोकधमैर्न लिप्यते॥
जैसे जल में ही पैदा होकर जल में ही रहने वाले कमलपत्र जल में लिप्त नहीं होते उसी प्रकार लोक में पैदा होकर लोक में रहते हुए भी वे उसमें लिप्त नहीं होते।
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