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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 7
प्रत्यात्ममधिगम्यत्वादपरप्रत्ययोदयम्‌। ज्ञानमेवं त्रिधा बोधात्‌ करुणा मार्गदेशनात्‌॥
प्रत्येक चित्त में बोध होने से, अपर प्रत्यय के रूप में उदित हुआ है। इस प्रकार ज्ञान तीन प्रकार का है - बोध से, करूणा से तथा मार्ग के उपदेश के कारण।
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