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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 67
मृत्युव्याधिजरादु:खमूलमायैरपोदधृतम्‌। कर्मक्लेशवशागातिस्तदभावान्न तेषु तत्‌ ।।
मृत्यु, व्याधि, जरा और दुःखों के मूलों को उखाड़ दिया है आयौँ ने, अतः कर्म, क्लेश के कारण जन्म ही नहीं होगा तब उसके अभाव से उनमें अन्य मृत्यु आदि भी नहीं होगे।
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