मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 65
त्रयोऽग्नयो युगान्तेऽग्निर्नारकः प्राकृतः क्रमात्‌। त्रयस्त उपमा तेया मृत्युव्धाधिजराग्नयः॥
युग के अन्तिम में तीन अग्नि हैं। वे है - अग्नि, नारक (अग्नि) और प्राकृत (अग्नि) हैं। इन तीनों के तीन उपमायें हैं - मृत्यु, व्याधि और जरा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें