नाभिनिर्वर्तयत्येनं कर्मक्लेशाम्बुसंचयः। न निर्दहत्युदीर्णोऽपि मृत्युव्याधिजरानल:॥
इसे कर्मक्लेशों का संचय कभी भी छू तक नहीं सकता और मृत्यु, व्याधि, जरा रूप अनल (अग्नि) इसे कभी जला नहीं सकता।
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