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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 61
कर्मक्लेशाम्बुसंभूताः स्कन्धायतनधातवः। उत्पद्यन्ते निरुध्यन्ते तत्संवर्तविवर्तवत्‌॥
कर्म क्लेश रूपी जल से उद्भूत स्कन्ध, धातु और अथतन हैं। जो उत्पन्न होते हैं, निरुद्ध होते हैं जैसे की संवर्त और विवर्त के (सुवर्ण) तरह।
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