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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 60
चित्तप्रकृतिमालीनायोनिशो मनसः कृतिः। अयोनिशोमनस्कारप्रभवे क्लेशकर्मणी॥
प्रकृति में विलीन चित्त का अयोनिश मनस्कार मन की ही कृति है। क्लेश और कर्म अयोनिश मनस्कार से होते हैं।
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