मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 56
स्कन्धधात्विन्द्रियं तद्वत्कर्मक्लेशप्रतिष्ठितम्‌। कर्मक्लेशाः सदायोनिमनस्कारप्रतिष्ठिताः॥
स्कन्ध, धातु और इन्द्रियाँ कर्म और क्लेशों पर आधारित हैं; और कर्म तथा क्लेश सदा अयुक्त (अविवेकी) मनोविचार पर आधारित रहते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें