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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 55
पृथव्यम्बौ जलं वायौ वायुर्व्योग्नि प्रतिष्ठित:। अप्रतिष्ठितमाकाशं वाय्वम्बुक्षितिधातुषु॥
पृथिवी जल में, जल वायु में, वायु आकाश में प्रतिष्ठित होते हैं किन्तु आकाश वायु, जल और पृथिवी में प्रतिष्ठित नहीं है।
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