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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 48
स्वभावादिभिरित्येभिः षड्भिरर्थैः समासतः। धातुस्तिसृष्ववस्थासु विदितो नामभिस्त्रिभिः॥
स्वभाव आदि ६ अर्थों के द्वारा संक्षेप में तीन धातुओं की अवस्था में तीन नामों से जाना गया है।
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