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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 47
अशुद्धोऽशुद्धशुद्धो ऽथ सुविशुद्धो यथाक्रमम्‌। सत्त्वधातुरिति प्रोक्तो बोधिसत्त्वस्तथागतः॥
अशुद्ध, अशुद्धशुद्ध तथा सुविशुद्ध क्रमशः सत्त्व धातु को जाना चाहिए जो बोधिसत्त्व तथागत रूप में हैं।
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