पृथग्जन, आर्यजन, संबुद्ध-बोधिसत्त्व और बुद्ध के तथता को लेकर ही प्राणियों में इस बुद्ध गर्भ का तत्त्वदर्शियाँ ने उपदेश किया है।
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