यदि वह बुद्ध धातु न होता तो दुःख का निवारण भी नहीं होता। दुःख के नाश की इच्छा और उसके लिए प्रार्थना भी नहीं होती और निर्वाण की कामना (प्रार्थना-संकल्प) भी नहीं होती।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।