बुद्ध से धर्म, धर्म से आर्यसङ्घ, संघ में बोधिगर्भ, जो ज्ञानधातु के अप्रत्व में परिनिष्ठित होता है। उस ज्ञान के द्वारा अग्रगति में अवस्थित बोधिसत्त्व, महासत्त्वो के गणों से सर्वप्राणियों के हित के लिए धर्मप्राप्त होता है। वही ज्ञप्ति भी है।
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