स्वभावार्थ, हेत्वर्थ, फलार्थ, कर्मार्थ, योगार्थ, वृत्यर्थ, अवस्था प्रभेदार्थ, सर्वत्रगार्थ, अविकारार्थ के भेद से संक्षेप में दश प्रकार के अर्थों को मन में रखकर परम तत्त्व ज्ञान विषयक तथागत धातु का व्यवस्थान भगवान् ने निर्देश किया है उसे जानना चाहिए।
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