सभी प्राणी बुद्ध ज्ञान के अन्तर्गत ही हैं और वह बुद्ध ज्ञान निर्मल तथा प्रकृति से ही अद्वय है। इसीलिए बुद्ध गोत्र में उक्त अद्वय फल के उपचार से सभी सत्त्वगण बुद्ध गर्भ के अन्तर्गत ही हैं यह कहा गया है।
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