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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 26
बोध्यं बोधिस्तदड़ानि बोधनेति यथाक्रमम्‌। हेतुरेक पदं त्रीणि प्रत्ययस्तद्विशुद्धये॥
बोध्य, बोधि, उनके अड़ और बोधना इसी क्रम से एक पद हेतु (कारण) है और तीन प्रत्यय हैं उसी के शुद्धि के लिए।
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