वे चार कारण हैं - शुद्धि के उपक्लिष्टता के योग से, निःक्लेश विशुद्धि से, अविनिर्भाग धर्म होने से और अविकल्प के कारण ही वह चार प्रकार का विषय अचिन्त्य कहा गया है।
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