गोत्रं रत्नत्रयस्यास्य विषयः सर्वदर्शिनाम्। चतुर्विधः स चाचिन्त्यश्चतुर्भिः कारणैः क्रमात्॥
सर्वदर्शियों का जो ज्ञातव्य विषय है बह तीन रत्नों का उत्पत्ति स्थान ही है। वह चार प्रकार का है और अचिन्त्य भी क्योंकि उसके क्रमशः चार कारण हैं।
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