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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 2
स्वलक्षणेनानुगतानि चैषां यथाक्रमं धारणिराजसूत्रे। निदानतस्त्रीणि पदानि विद्याच्चात्वारि धीमज्जिनधर्मभेदात्‌॥
इस निर्देशन के बाद १६ प्रकार के दलों से संयुक्त महाबोधि करुणा के निर्देश से बुद्ध बोधि परिदीपित होती है। उस निर्देश के बाद, ३२ आकार से युक्त निरुत्तर तथागत कर्म निर्देश से बुद्ध कर्म परिदीपित होता है। इस प्रकार के वे सात वज्रपद स्वलक्षण निर्देश के द्वारा विस्तारपूर्वक उन सूत्तो से जानने चाहिए। इनका अनुश्लेष (सम्बन्ध) क्या है?
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