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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 16
यावद्‌भाविकता ज्ञेयपर्यन्तगतया धिया। सर्वसत्त्वेषु सर्वज्ञधर्मतास्तित्वदर्शनात्‌॥
ज्ञेयपर्यन्तगत बुद्धि से सभी प्राणियों में सर्वज्ञ धर्म के अस्तित्व दर्शन से ही भाविकता की सिद्धि होती है।
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