जिन्होंने समग्र प्राणियों के स्वभाव को जान लिया है और नैरात्म्यकोटिरूप शिवस्वरूप को जान लिया है। जिससे उनका चित्त प्रकृति से प्रभास्वर हो गया है तथा क्लेश के स्वभाव के लक्षण से जिनकी बुद्धि सर्वत्र व्यापक हो गयी है, उसी व्यापक बुद्धि से सर्वत्र सम्बुद्धत्व को ही देखते हैं, ऐसे सत्त्वो के विशुद्धि अनन्त विषय रूप ज्ञान-लक्षण युक्त भगवान् को नमस्कार है।
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