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रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 123
हेम्नो यथान्तःक्वथितस्य पूर्ण बिम्बं बहिर्मृन्मयमेक्ष्य शान्तम्‌। अन्तर्विशुदध्यै कनकस्य तज्ज्ञः संचोदयेदावरणं बहिर्धा॥
कोई मूर्ति है बाहर से मिट्टी दिखती है किन्तु वह मूर्ति तो पूर्ण रूप से सुवर्ण से बनी हुई है, को जानकार उसे देखकर बताता है कि यह लेप केवल बाहर मिट्टी का है भीतर तो सुवर्ण है।
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