जैसे रत्नों से बनी हुई तथागत की मूर्ति को किसी अपवित्र कपड़े से लपेटकर रास्ते में फ़ैंक दी गई हो, उसे किसी दिव्य दृष्टि सम्पन्न व्यक्ति ने मनुष्यों को दिखा दिया कि देखो यह रत्नमयी तथागत मूर्ति है तब उसे लोगों ने मुक्त किया। उसी प्रकार क्लेश रूपी अपवित्र वस्त्रों से ढक कर संसार रूपी मार्ग में फेंके हुए तथागत धातु को देखकर तथागत ने उनकी मुक्ति के लिए धर्म का उपदेश दिया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।