इसी प्रकार अनेक क्लेश मलों से आवृत सुगतात्म भाव को, किसी असङ्ग एवं दिव्य चक्षु सम्पन्न व्यक्ति ने, देखकर पशु प्राण आदि समस्त संसार को और उन्हें मुक्ति के उपाय को बताते हैं।
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