जल, सूर्य के किरण, पृथिवी और समय के कारणों से एक नन्हा सा बीज - जो आम, ताल आदि वृक्षों का है, वह क्रमश: बड़ा होकर विशालकाय वृक्ष बन जाता है। उसी प्रकार प्राणियों के अन्दर अविद्या कोश से ढका हुआ संबुद्धत्व का बीज क्रमशः शुभ कारणों के आ जाने पर अङ्कुर होते हुए विशिष्ट धर्म वृक्ष बन जाता है।
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