जैसे आम, ताल आदि वृक्षों में बीज ओर उसमें अविनाशी (सुन्दर) अङ्कर लगते हैं - पृथिवी में, जल मल आदि के सहयोग द्वारा। क्रमश: वह बीजाङ्कर विशाल वृक्ष बन जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।