जैसे की गाय के गोबर में फॅसे हुए अनेक धान आदि अन्नों को देखकर कोई देवता मुनिगणों को यह बताता है कि देखो वहाँ पर अन्न है आप लोग उसे लेकर शुद्ध करो और उससे अपना कार्य करो। इसी प्रकार महान् अशुद्ध मलों में पतित बुद्ध रत्न को देखकर भगवान् तथागत उन जनों को उपदेश देते है उसे शुद्ध कर अनेक कार्यों को करने के लिए।
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