कोई व्यक्ति सुवर्ण लेकर कहीं जा रहा है, उसे पता नहीं चला और उसका वह बहुमूल्य सुवर्ण अत्यन्त अपवित्र जगह में गिर गया और हजारों वर्षो तक पडा ही रहा किन्तु उसमें कोई विकार नहीं आया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।