जैसे हजारों मधुमक्षिकाओं से मधु का छत्ता घिरा रहता है, किन्तु मधु को चाहने वाला पुरुष उन सभी को भगाकर-मारकर अपने लिए उस मधु को ले ही लेता है उसी प्रकार अनन्त कामनों के द्वारा घिरे हुए अपने आप को देखकर तथा उसके भीतर के ज्ञान राशि (मधु) को पता लगाकर सबसे पहले उन कामनाओं को हटाकर मारकर उस मधु ज्ञान को ले लेता है वही विद्वान् है। वही बुद्धिमान् और जिन भी है।
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