जैसे मधु विभिन्न वस्तुओं के अन्तस्तल पर छिपा हुआ होता है उसी प्रकार विद्वान् पुरुष इस रहस्य को समझ कर चारों ओर खोजकर अपने आवश्यक मधु का संचय करें। उसके लिए उपायों का अन्वेषण करें।
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