मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रत्नगोत्रविभाग • अध्याय 1 • श्लोक 102
यथा मधु प्राणिगणोपगूढं विलोक्य विद्वान्‌ पुरुषस्तद्थी। समन्ततः प्राणिगणस्य तस्मादुपायतोऽपक्रमणं प्रकुर्यात्‌॥
जैसे मधु विभिन्न वस्तुओं के अन्तस्तल पर छिपा हुआ होता है उसी प्रकार विद्वान्‌ पुरुष इस रहस्य को समझ कर चारों ओर खोजकर अपने आवश्यक मधु का संचय करें। उसके लिए उपायों का अन्वेषण करें।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रत्नगोत्रविभाग के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रत्नगोत्रविभाग के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें