यद्यपि यह हो सकता है कि कोई कमल पुष्प जुगुप्सित ही हो फिर भी दिव्य दृष्टि सम्पन्न व्यक्ति उसके अन्तःस्थल में छिपे हुए अच्छे पत्रों को देखे और उन्हें अपने लिए ले आए। इसी प्रकार प्रत्येक शरीर के भीतर राग, द्वेष, मल आदि कोष अवश्य विद्यमान रहते हैं किन्तु करुणापूर्ण दृष्टियुक्त होकर उसके अन्दर अवस्थित विशुद्ध चित्त को देखकर उसे अपनाए। वैसा ही मुनि, भगवान् तथागत करते हैं।
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